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वसुंधरा के सहयोगियों का भ्रष्टाचार (राजस्थान)

Raje Aids Corruption (Rajasthan)

राजस्थान सरकार ने एक अध्यादेश पारित किया, जो प्रभावी रूप से सेवारत और सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों, मजिस्ट्रेटों और न्यायाधीशों के खिलाफ किसी भी प्रकार की जांच को समाप्त कर रहा था। इसका उद्देश्य स्पष्ट सबूत होने पर भी भ्रष्ट अधिकारियों को दंड से मुक्ति प्रदान करना था। भ्रष्ट अधिकारियों को मामले को दफनाने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था और मीडिया को किसी भी अधिकारी की पहचान का खुलासा करने से रोक दिया गया था। इस प्रभाव के साथ आपराधिक कानून (राजस्थान संशोधन) विधेयक, 2017 पेश किया गया था। इस भ्रष्टाचार विरोधी दृष्टिकोण के लिए तत्कालीन राजे सरकार को गंभीर आलोचना का सामना करना पड़ा और बाद में विधेयक वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।

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तस्वीर साभार : NDTV

राफेल घोटाला

Rafale scam

यूपीए सरकार द्वारा की गई बातचीत की तुलना में काफी अधिक दर पर 36 राफेल जेट खरीदने के लिए मोदी सरकार ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। यूपीए ने 126 विमान खरीदने के लिए मूल सौदे पर हस्ताक्षर किए थे। मोदी सरकार ने सार्वजनिक रूप से विमान की कीमत बताने से इंकार कर दिया है और कहा है कि भारत और फ्रांस के बीच इस सौदे में गोपनीयता की शर्त मौजूद है। हालांकि, गोपनीयता की यह शर्त भारत को केवल तकनीकी विनिर्देशों और विमान की परिचालन क्षमताओं को प्रकट करने से रोकता है, न की कीमत का खुलासा करने से। फ्रांसीसी निर्माता डेसॉल्ट ने 36 विमानों की कुल कीमत पहले से ही जारी कर दी है, जो लगभग 60,000 करोड़ रुपये है। यूपीए द्वारा बातचीत के अनुसार, यह प्रति विमान 526 करोड़ रुपये मूल्य के मुक़ाबले 1,660 करोड़ रुपये है। यूपीए की कीमत में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (टीओटी) और भारत के स्वामित्व वाली हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा 108 विमानों का निर्माण शामिल था। नए सौदे के तहत, कोई टीओटी नहीं है और एचएएल, जिसका रक्षा उत्पादन में अच्छा रिकॉर्ड है को हटाकर, अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस एयरोस्पेस को विमान निर्माण की ज़िम्मेदारी दी गयी। इसके अलावा, डेसॉल्ट एविएशन की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, कतर और मिस्र ने उसी विमान को 1319 करोड़ रुपये में खरीदा है। इसके अतिरिक्त, सुरक्षा समिति की कैबिनेट कमेटी की कोई पूर्व स्वीकृति नहीं मांगी गई थी।

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तस्वीर साभार : Indian Express

हाउसिंग बोर्ड घोटाला (राजस्थान)

RHB property (Rajasthan)

लोकायुक्त रिपोर्ट में कहा गया है कि सूरसागर से भाजपा विधायक, सूर्यकांता व्यास को 2007 में जोधपुर में एक आवासीय संपत्ति आवंटित की गई थी, जिसे आधिकारिक तौर पर आवास बोर्ड आयुक्त के लिए आरक्षित किया गया था। व्यास को 33,11,631 रुपये की कुल लागत पर 50% छूट दी गई थी। उन्हें केवल 17,51,003 रुपये का भुगतान करना पड़ा, जिससे राजकोष में भारी नुकसान हुआ।

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तस्वीर साभार : Indian Express