सभी घोटाले देखने के लिए क्लिक करें:

G

मूंगफली घोटाला

एक 4000 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया था, जिसमें गुजरात सरकार द्वारा किसानों से मूंगफली की खरीद शामिल थी। खरीदी गयी मूंगफली मिलों को बेचीं गयी और फिर शून्य हानि दिखाने के लिए स्टॉक के वजन में रेत और कंकड़ की मिलावट कर दी गयी। जिन गोदामों में इस तरह के स्टॉक रखे गए थे, वहां आग लगने की चार संदिग्ध घटनाएं भी हुईं।

Read More

Image Courtesy: DNA India

गिफ्ट सिटी घोटाला (गुजरात)

GIFT scam (Gujarat)

कैग ने 2013 में एक रिपोर्ट के जरिए गांधीनगर में गिफ्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए भूमि आवंटन मे हुई धांधलेबाजियों के बारे में बताया था। राज्य कैबिनेट द्वारा 2700 करोड़ रुपये की कीमत वाली भूमि 1 रुपये में आवंटित कर दी गयी थी। राज्य सरकार ने आवंटियों को बिना अनुमति के जमीन पट्टे पर देने का अधिकार दे दिया।

अधिक पढ़ें

तस्वीर साभार : India Today

अनुबंध घोटाला (गोवा)

GSIDC Contractor Scam (Goa)

गोवा राज्य बुनियादी ढांचा विकास निगम (जीएसआईडीसी) ने पक्षपाती ढंग से मिरामर-डोना पाउला कंक्रीट रोड के निर्माण के लिए एम वी राव को 72.59 करोड़ रुपये का अनुबंध दे दिया। फरवरी 2014 से 18 महीने तक निर्माण कार्य के पूरा होने की अवधि थी, लेकिन ठेकेदार ने बार-बार समय सीमा बढ़ाई और आखिरकार अगस्त 2016 में इसे जनता के लिए खोला गया। एक साल से भी कम समय में सड़क में दरारें आ गयी क्योंकि निर्माण में निम्न गुणवत्ता वाली सामग्री का उपयोग किया गया था।

अधिक पढ़ें

तस्वीर साभार : Herald Goa

परामर्शदाता घोटाला (गोवा)

GSIDC Consultant Scam (Goa)

गोवा के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने नदी पर नए मंडोवी पुल के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की और इसे पहले से ही भ्रष्टाचार के आरोप झेल रहे जीएसआईडीसी को सौंपा गया। इस परियोजना को संभालने के लिए सरकार ने ब्लैकलिस्टेड एस एन भुबे एंड एसोसिएट्स को परामर्श शुल्क के रूप में 10 करोड़ रूपये का भुगतान किया। बाद में, पुल निर्माण में जंग लगी हुई स्टील के इस्तेमाल की भी सूचना सामने आयी।

अधिक पढ़ें

तस्वीर साभार : Goa Prism

जीएसपीसी घोटाला (गुजरात)

GSPC scam

26 जून, 2005 को गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि, गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (जीएसपीसी) ने केजी बेसिन में 2,20,000 करोड़ रुपये मूल्य का भारत का सबसे बड़ा गैस भंडार खोजा है। उन्होंने यह भी कहा कि जीएसपीसी द्वारा 1500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और 2007 में इस गैस का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करेंगे।

दो साल बाद, 4 नवंबर 2009 को, जीएसपीसी द्वारा 8465 करोड़ रुपये की लागत के 'फील्ड डेवलपमेंट प्लान' को मंजूरी दे दी गई, जो तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी द्वारा बताई गयी लागत से काफी अधिक है। साथ ही, इस ‘प्लान’ ने नरेंद्र मोदी के गैस भंडार के अनुमान को भी 90% तक घटा दिया।

जीएसपीसी ने 31 मार्च, 2015 तक 15 से अधिक सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र के बैंकों से 19,716 करोड़ रुपये उधार लिया और अभी तक वाणिज्यिक उत्पादन भी शुरू नहीं किया है।

अधिक पढ़ें

तस्वीर साभार : Business Line